स्मूदनिंग, स्ट्रेटनिंग और रिबॉन्डिंग में होता है काफी फर्क, अपने बालों की जरूरत के हिसाब से ऐसे चुने इन्हें

किसी भी हेयर ट्रीटमेंट (Hair Care Tips) को लेने से पहले उसके बारे में पूरी तरह जानना जरूरी होता है। अलग-अलग बालों की जरूरत अलग होती है। यहां जानिए हेयर स्मूदनिंग, स्ट्रेटनिंग और रिबॉन्डिंग(Difference Between Hair Smoothening, Rebonding And Straightening) में क्या फर्क है।

हेयर स्मूदनिंग, स्ट्रटनिंग और रिबॉन्डिंग में काफी फर्क होता है(फोटो:पिक्साबे)

आजकल लड़कियों के बीच हेयर स्मूदनिंग, रिबॉन्डिंग और स्ट्रेटनिंग (Difference Between Hair Smoothening, Rebonding And Straightening) का काफी ट्रेंड है। ये आपके बालों के साथ-साथ आपको भी अलग लुक देते हैं। लेकिन क्या आप भी इन ट्रीटमेंट के बारे में बिना सोचे-समझे और अपने बालों की जरूरत जाने बिना इन्हें करवाने की गलती करती हैं, तो अपनी ये आदत बदलिए।

चाहे हेयर स्ट्रेटनिंग हो, स्मूदनिंग या रिबॉन्डिंग हर ट्रीटमेंट का अपना एक अलग फायदा और बालों (Hair Care Tips) के लिए इनकी अलग जरूरत होती है। अगर आप अपने बालों की जरूरत के मुताबिक इन्हें नहीं चुनेंगी, तो ये नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। यहां जानिए इन तीनों में फर्क और अपनी जरूरत के हिसाब से इनका चुनाव करें।

क्या है हेयर स्मूदनिंग
अगर आपके बाल वेवी हैं, तो ये ट्रीटमेंट आपके लिए ही है। इसमें सबसे पहले आपके बालों पर फॉर्मेलडिहाइड सॉल्यूशन लगाया जाता है। इसके सूखने के बाद फ्लैट आयरन से बालों को स्ट्रेट पोजिशन में लॉक किया जाता है। इसमें केमिकल का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता है इसलिए बालों को कम नुकसान होता है। ये इफेक्ट 2 से 4 महीने तक रहता है। इससे आपके बालों को नेचुरल लुक मिलता है। अगर आपके बाल काफी मोटे, घने या कर्ली हैं, तो ये ट्रीटमेंट आपके लिए नहीं है।

क्या है हेयर स्ट्रेटनिंग
अगर आपके बाल काफी ज्यादा कर्ली या घने हैं, तो ये ट्रीटमेंट आपके लिए ही है। जहां स्मूदनिंग में आपके बालों को नेचुरल लुक मिलता है वहीं, इसमें बालों को थोड़ा आर्टिफिशियल लुक मिलता है। साथ ही इसमें स्मूदनिंग की तुलना में ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल होता है। इसमें सबसे पहले बालों पर केमिकल इस्तेमाल करके हेयर बॉन्ड को पहले तोड़ा जाता है। इसके बाद हीट और केमिकल के इस्तेमाल से बॉन्ड को रिस्ट्रक्चर किया जाता है। इसका इफेक्ट करीब 4-5 महीने तक जब तक आपके बालों की ग्रोथ नहीं हो जाती तब तक रहता है। स्मूदनिंग की तुलना में ये थोड़ा महंगा होता है।

क्या है रिबॉन्डिंग
रिबॉन्डिंग उन लड़कियों के लिए बेहतर ऑप्शन हैं जिनके बाल काफी कर्ली और साथ ही फ्रिजी होते हैं। हालांकि, स्ट्रेटनिंग और रिबॉन्डिंग में ज्यादा फर्क नहीं है। ये स्ट्रेटनिंग का एक स्पेशल टेक्नीक है। अगर आपके बाल काफी ज्यादा मोटे या घने हैं, तो भी आप इस ट्रीटमेंट को चुनें। इसमें पहले स्ट्रेटनर की मदद से हेयर स्ट्रक्चर और नेचुरल बॉन्ड को तोड़ा जाता है।

इसके बाद हेयर न्यूट्रालाइजर से हेयर बॉन्ड के फिक्स किया जाता है। इसे करने में कम से कम 4 से 5 घंटे का वक्त लगता है। इसमें केमिकल आपके बालों के अंदरूनी लेयर तक जाता है। इस ट्रीटमेंट में काफी स्ट्रॉंग केमिकल का इस्तेमाल होता है। ये बाकी ट्रीटमेंट की तुलना में महंगा होता है। इसमें बाल काफी कमजोर हो जाते हैं इसलिए इस ट्रीटमेंट के बाद बालों को काफी केयर की जरूरत पड़ती है।

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जागृति प्रिया :मुझे एंटरटेंमेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ, ट्रेंड और ब्यूटी की खबरें लिखना पसंद है। पाठकों को इनसे जुड़ी खबरों से अवगत कराती हूं। मैंने पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद माखनलाल यूनिवर्सिटी से मास्टर इन जर्नलिज्म किया है।